Tata Harrier Defect Case: कोर्ट ने टाटा मोटर्स को दिया बड़ा झटका, 21 लाख रुपये लौटाने या नई कार देने का आदेश
कोर्ट ने टाटा मोटर्स को दिया बड़ा झटका, 21 लाख रुपये लौटाने या नई कार देने का आदेश
नई दिल्ली | विशेष रिपोर्ट
Tata Harrier Defect Case: नई कार खरीदना हर परिवार का सपना होता है। लेकिन अगर वही
कार बार-बार खराब होने लगे, सर्विस सेंटर के चक्कर कटवाए और
आखिर में जान का खतरा बन जाए, तो क्या होगा? ऐसा ही एक
मामला टाटा मोटर्स की लोकप्रिय एसयूवी Tata Harrier से जुड़ा सामने आया है,
जिसमें राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग ने ग्राहक के पक्ष में बड़ा फैसला सुनाया है।
कहानी की शुरुआत: सपनों की एसयूवी, लेकिन लगातार खराबी
रिपोर्ट के अनुसार, एक ग्राहक ने करीब 21 लाख रुपये खर्च कर
नई टाटा हेरियर खरीदी थी। शुरुआत में सब कुछ सामान्य रहा,
लेकिन कुछ ही समय बाद कार में तकनीकी समस्याएं आने लगीं।
ग्राहक ने आरोप लगाया कि वाहन में बार-बार गंभीर खराबियां सामने
आ रही थीं और कई बार सर्विस सेंटर ले जाने के बावजूद समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हुई।
सबसे बड़ी चिंता यह थी कि कुछ खराबियां वाहन की सुरक्षा से जुड़ी थीं।
ग्राहक का कहना था कि ऐसी स्थिति में कार चलाना उसके और परिवार के लिए जोखिम भरा हो गया था।
Tata Harrier Defect Case: सर्विस सेंटर के कई चक्कर, लेकिन समाधान नहीं
ग्राहक ने क्या-क्या किया?
- कार को कई बार अधिकृत सर्विस सेंटर में दिखाया
- विभिन्न पार्ट्स बदले गए
- वारंटी के तहत मरम्मत की गई
- फिर भी वही समस्याएं दोबारा आती रहीं
टाटा मोटर्स ने क्या कहा?
कंपनी ने आयोग के सामने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि वाहन में
कोई निर्माण दोष (Manufacturing Defect) नहीं है। कंपनी के अनुसार,
ग्राहक को वारंटी के तहत आवश्यक सेवाएं दी गईं और
सभी शिकायतों का समाधान करने का प्रयास किया गया।
फैसला बदलने वाला मोड़: आयोग ने रिकॉर्ड देखे
राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) ने मामले की गहराई से
जांच की। आयोग ने वाहन की सर्विस हिस्ट्री, मरम्मत के रिकॉर्ड और
बार-बार दर्ज की गई शिकायतों का अध्ययन किया।
आयोग ने माना कि अगर नई कार में लगातार एक जैसी समस्याएं
आती रहें और कई मरम्मतों के बाद भी वे खत्म न हों, तो इसे सामान्य खराबी नहीं माना जा सकता।
NCDRC का बड़ा आदेश
आयोग ने टाटा मोटर्स को क्या आदेश दिया?
- ग्राहक को नई टाटा हेरियर उपलब्ध कराई जाए
- या लगभग 21 लाख रुपये की पूरी राशि वापस की जाए
- मानसिक पीड़ा के लिए अतिरिक्त मुआवजा दिया जाए
- मुकदमे का खर्च भी कंपनी वहन करे
यह फैसला इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
भारत में अक्सर ग्राहक यह मान लेते हैं कि वारंटी के दौरान मरम्मत हो गई
तो मामला खत्म हो गया। लेकिन इस फैसले ने साफ कर दिया कि
अगर वाहन में बार-बार वही गंभीर समस्या आती है, तो ग्राहक सिर्फ
मरम्मत ही नहीं बल्कि रिफंड या रिप्लेसमेंट भी मांग सकता है।
उपभोक्ता अधिकारों को मिली ताकत
उपभोक्ता संरक्षण कानून 2019 के तहत
ग्राहकों को दोषपूर्ण उत्पादों के खिलाफ शिकायत करने का अधिकार है।
अगर किसी वाहन में निर्माण दोष साबित होता है, तो आयोग कंपनी को रिफंड,
रिप्लेसमेंट या मुआवजा देने का आदेश दे सकता है।
ऑटो सेक्टर के लिए चेतावनी
हाल के वर्षों में वाहन कंपनियों के खिलाफ उपभोक्ता मामलों में
बढ़ोतरी देखी गई है। खासकर इंजन, स्टीयरिंग, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम,
सेंसर और सुरक्षा फीचर्स से जुड़ी शिकायतें तेजी से बढ़ी हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अब कंपनियों को सिर्फ बिक्री पर नहीं,
बल्कि क्वालिटी कंट्रोल और आफ्टर-सेल्स सर्विस पर भी गंभीरता से ध्यान देना होगा।
ग्राहकों के लिए क्या सीख?
अगर आपकी नई कार में लगातार खराबी आ रही है
- सभी सर्विस रिकॉर्ड संभालकर रखें
- लिखित शिकायत करें
- ईमेल और जॉब कार्ड सुरक्षित रखें
- जरूरत पड़ने पर उपभोक्ता आयोग में शिकायत करें
निष्कर्ष
टाटा हेरियर मामले में आया यह फैसला भारतीय उपभोक्ताओं के
लिए एक बड़ा संदेश है—महंगी कार खरीदने के बाद ग्राहक सिर्फ
कंपनी की दया पर निर्भर नहीं है। अगर वाहन में गंभीर और लगातार
आने वाली खराबियां हैं, तो कानून ग्राहक के साथ खड़ा हो सकता है।
यह निर्णय न केवल टाटा मोटर्स बल्कि पूरे ऑटोमोबाइल उद्योग के
लिए एक चेतावनी है कि ग्राहक की सुरक्षा और भरोसा सबसे ऊपर है।