23 नए मंत्रियों को शामिल किया गया
Vijay | तमिलनाडु की राजनीति में एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिला है। अभिनेता से नेता बने C. Joseph Vijay ने मुख्यमंत्री बनने के कुछ ही दिनों बाद अपने मंत्रिमंडल का बड़ा विस्तार किया है। इस विस्तार में 23 नए मंत्रियों को शामिल किया गया, जिनमें 7 दलित मंत्री भी हैं। सबसे खास बात यह रही कि लगभग 59 साल बाद कांग्रेस फिर से तमिलनाडु सरकार का हिस्सा बनी है।
“नई गठबंधन राजनीति” की शुरुआत
राजनीतिक जानकार इसे तमिलनाडु की “नई गठबंधन राजनीति” की शुरुआत मान रहे हैं। लंबे समय तक राज्य की राजनीति DMK और AIADMK जैसी द्रविड़ पार्टियों के इर्द-गिर्द घूमती रही, लेकिन अब विजय की पार्टी TVK (Tamilaga Vettri Kazhagam) ने सत्ता में आकर नया समीकरण बनाया है। Tamilaga Vettri Kazhagam के नेतृत्व वाली सरकार को बहुमत के लिए सहयोगी दलों की जरूरत थी, जिसके बाद कांग्रेस समेत कई सहयोगी दल सरकार में शामिल हुए।
कांग्रेस की वापसी
कांग्रेस की वापसी इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि 1967 के बाद पहली बार पार्टी को तमिलनाडु सरकार में मंत्री पद मिला है। कांग्रेस के दो विधायकों — P. Viswanathan और S. Rajesh Kumar — को मंत्री बनाया गया है। इनमें पी. विश्वनाथन को उच्च शिक्षा विभाग जैसा महत्वपूर्ण मंत्रालय दिया गया है।
कैबिनेट में 7 दलित मंत्री
बता दें कि विजय ने अपने नए मंत्रिमंडल में सामाजिक संतुलन पर भी खास ध्यान दिया है। कैबिनेट में 7 दलित मंत्री, 4 महिला मंत्री, 2 ब्राह्मण चेहरे और 40 साल से कम उम्र के कई युवा नेताओं को मौका दिया गया है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह कदम अलग-अलग जातीय और सामाजिक वर्गों को साधने की रणनीति का हिस्सा है।
Vijay | विजय ने साफ संकेत दिया
सूत्रों के मुताबिक विजय ने AIADMK के बागी नेताओं को मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया। माना जा रहा था कि सरकार बचाने में मदद करने वाले कुछ बागी नेताओं को जगह मिल सकती है, लेकिन विजय ने साफ संकेत दिया कि वे स्थिर और “एक परिवार” जैसी कैबिनेट चाहते हैं।
यह भी पहली बार है जब तमिलनाडु में द्रविड़ राजनीति के लंबे दौर के बाद किसी गैर-द्रविड़ दल के नेतृत्व में गठबंधन सरकार बनी है। विजय की यह राजनीतिक शैली पारंपरिक तमिल राजनीति से अलग दिखाई दे रही है, जहां युवा नेतृत्व, सामाजिक प्रतिनिधित्व और गठबंधन सहयोग पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है। (Courtesy Wikipedia)
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह गठबंधन मजबूत बना रहता है, तो तमिलनाडु की राजनीति आने वाले वर्षों में पूरी तरह बदल सकती है। कांग्रेस के लिए भी यह वापसी दक्षिण भारत में नई ऊर्जा देने वाली मानी जा रही है।